जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन के नियमों में बड़ा बदलाव, 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी

भारत में जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। सरकार ने जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित, भरोसेमंद और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है। लोकसभा ने इसे 31 जुलाई 2026 और राज्यसभा ने 4 अगस्त 2026 को पास किया।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन समय पर नहीं कराते हैं। खासकर दो साल से ज्यादा देरी वाले मामलों में अब प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त होगी।

जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन में क्या बदलेगा?

सरकार का उद्देश्य Civil Registration System को मजबूत करना और जन्म-मृत्यु की जानकारी समय पर रिकॉर्ड करना है। नए प्रावधान में देरी के आधार पर अलग-अलग स्तर की मंजूरी का प्रावधान किया गया है।

1. एक साल के अंदर रजिस्ट्रेशन

जन्म या मृत्यु की जानकारी सामान्य तौर पर समय पर Registrar को देना जरूरी है। जितनी जल्दी रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा, प्रक्रिया उतनी ही आसान रहेगी।

इसलिए परिवारों को सलाह दी जाती है कि बच्चे के जन्म या परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद संबंधित स्थानीय Registrar के पास निर्धारित समय में रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं।

2. एक से दो साल की देरी पर क्या होगा?

अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल के अंदर दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन के लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारी की मंजूरी और घटना की सत्यता की जांच जरूरी होगी।

इस स्थिति में District Magistrate (DM), Sub-Divisional Magistrate (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत Executive Magistrate की भूमिका होगी।

यानी अगर किसी कारण से रजिस्ट्रेशन में काफी देरी हो गई है, तो सिर्फ सामान्य आवेदन से काम नहीं चलेगा।

दो साल से ज्यादा देरी हुई तो कोर्ट की मंजूरी जरूरी

नए संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दो साल से अधिक पुराने मामलों से जुड़ा है।

अगर किसी जन्म या मृत्यु की जानकारी घटना के दो साल से ज्यादा समय बाद दी जाती है, तो अब ऐसे रजिस्ट्रेशन के लिए First Class Judicial Magistrate के आदेश की आवश्यकता होगी।

इसका मतलब है कि बहुत पुराने जन्म या मृत्यु रिकॉर्ड को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से दर्ज कराना आसान नहीं रहेगा। मामले में न्यायिक स्तर की जांच और आदेश की आवश्यकता पड़ेगी।

सरकार ने नियमों को सख्त क्यों किया?

सरकार का कहना है कि जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर दर्ज होना जरूरी है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज और रिकॉर्ड में देरी जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

सटीक Civil Registration System से सरकार को जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा और विभिन्न सरकारी सेवाओं से संबंधित योजनाओं के लिए बेहतर डेटा उपलब्ध हो सकता है।

नए बदलाव का उद्देश्य मुख्य रूप से:

  • जन्म और मृत्यु का समय पर रजिस्ट्रेशन बढ़ाना
  • पुराने और गलत रिकॉर्ड की संभावना कम करना
  • सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ाना
  • डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम को मजबूत करना
  • देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन की जांच को सख्त करना
  • फर्जी या गलत जानकारी के इस्तेमाल पर रोक लगाना

Birth Certificate इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

Birth Certificate सिर्फ जन्म की तारीख बताने वाला दस्तावेज नहीं है। 2023 में किए गए बदलावों के बाद जन्म प्रमाण पत्र को कई महत्वपूर्ण सरकारी और नागरिक प्रक्रियाओं में जन्म की तारीख और स्थान के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने का प्रावधान किया गया था।

इसमें शिक्षा संस्थान में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची, विवाह पंजीकरण, सरकारी नौकरी, पासपोर्ट और Aadhaar से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

इसी वजह से जन्म का रिकॉर्ड सही समय पर बनवाना बेहद जरूरी हो गया है।

Death Certificate भी जरूरी दस्तावेज

मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल भी कई जरूरी कामों में होता है। उदाहरण के लिए बैंक रिकॉर्ड अपडेट करना, बीमा क्लेम, पेंशन, संपत्ति से जुड़े मामलों और सरकारी रिकॉर्ड में व्यक्ति की स्थिति अपडेट करने जैसी प्रक्रियाओं में इसकी जरूरत पड़ सकती है।

इसलिए परिवार को मृत्यु के बाद भी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को टालना नहीं चाहिए।

डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम पर भी जोर

भारत में जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की दिशा में पहले ही महत्वपूर्ण बदलाव किए जा चुके हैं। 2023 के संशोधन में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जन्म-मृत्यु का डेटाबेस तैयार करने तथा डिजिटल रजिस्ट्रेशन और इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण पत्र जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया था।

इससे भविष्य में सरकारी सेवाओं और विभिन्न डेटाबेस में सही जानकारी के इस्तेमाल को आसान बनाया जा सकता है।

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?

आम नागरिकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन समय पर कराया जाए। अगर रजिस्ट्रेशन में लंबी देरी होती है तो अतिरिक्त दस्तावेज, सत्यापन और संबंधित अधिकारी की मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है।

दो साल से ज्यादा पुराने मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होने से प्रक्रिया और अधिक औपचारिक हो जाएगी।

इसलिए अगर परिवार में किसी बच्चे का जन्म हुआ है या किसी सदस्य की मृत्यु हुई है और अभी तक उसका रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया है, तो संबंधित स्थानीय Registrar/नगर निकाय/पंचायत कार्यालय से प्रक्रिया की जानकारी लेकर जल्द आवेदन करना बेहतर रहेगा।

ध्यान देने वाली जरूरी बात

सोशल मीडिया पोस्ट में कई बार नए कानून को तुरंत लागू हो चुका बताया जाता है। यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए—संसद से बिल पास होना और उसका कानून के रूप में लागू होना अलग-अलग चरण हैं।

मौजूदा उपलब्ध संसदीय जानकारी के अनुसार 2026 का संशोधन विधेयक दोनों सदनों से पास हो चुका है। इसके लागू होने की तारीख और विस्तृत प्रक्रिया के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना को देखना जरूरी होगा।

निष्कर्ष

जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन अब केवल एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यक्ति की पहचान और कई महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़ा रिकॉर्ड है। नए 2026 संशोधन का मुख्य फोकस Delayed Registration को सख्त करना है।

खास तौर पर दो साल से अधिक देरी वाले जन्म या मृत्यु रजिस्ट्रेशन के लिए Judicial Magistrate की मंजूरी का प्रावधान महत्वपूर्ण बदलाव है। इसलिए किसी भी जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन समय पर कराना भविष्य में होने वाली परेशानी से बचने का सबसे आसान तरीका है।

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